कैंसर, लकवा और 4 सर्जरी! फिर भी नहीं टूटा हौसला, 38 की उम्र में संजय ने क्रैक की UPSC

 नई दिल्ली: जिंदगी में मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो तो मंज़िल जरूर मिलती है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के रहने वाले संजय धरैया की कहानी इसी जज़्बे की मिसाल है। 6 साल तक कैंसर से लड़ाई, लकवे की परेशानी और 4 बड़ी सर्जरी झेलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार 38 साल की उम्र में UPSC परीक्षा में 946वीं रैंक हासिल कर ली।

गांव से शुरू हुआ सफर

संजय का बचपन छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बेलदाकली गांव में बीता। उनके पिता किसान हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। बावजूद इसके माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया। संजय ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की।

नवोदय से मिला बड़ा सपना

बाद में उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय में हुआ, जहां से उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान उन्होंने पहली बार एक IAS अधिकारी को देखा। उस दिन से उनके मन में भी प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना जन्म ले चुका था।

नौकरी के साथ जारी रही तैयारी

पढ़ाई पूरी करने के बाद संजय ने परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए नौकरी करना शुरू कर दिया। उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इंडिया पोस्ट सहित कई सरकारी संस्थानों में काम किया। नौकरी के साथ-साथ वे रोज 6-7 घंटे पढ़ाई कर UPSC की तैयारी करते रहे।

जिंदगी ने लिया कठिन मोड़

साल 2012 में उनकी जिंदगी अचानक बदल गई, जब उन्हें कैंसर का पता चला। इलाज के दौरान उन्हें लकवे की समस्या भी झेलनी पड़ी। 2013 से 2015 के बीच उनकी चार बड़ी सर्जरी हुईं। लंबे इलाज, अस्पतालों के चक्कर और शारीरिक दर्द के बावजूद उन्होंने अपने सपने को कभी नहीं छोड़ा।

असफलता के बाद भी नहीं मानी हार

संजय ने पहली बार 2019 में UPSC परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। यह समय उनके लिए बेहद कठिन था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2022 में उन्होंने रायपुर में रहकर पूरी ताकत से फिर से तैयारी शुरू की।

आखिरकार रंग लाई मेहनत

लगातार संघर्ष और मेहनत का फल आखिरकार उन्हें मिला। UPSC 2025 के परिणाम में संजय धरैया ने 946वीं रैंक हासिल की। यह सिर्फ एक परीक्षा में सफलता की कहानी नहीं, बल्कि जिंदगी से लड़कर जीतने की मिसाल है।

हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा

संजय की कहानी बताती है कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर मन में विश्वास और मेहनत का जज़्बा हो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। उनका संघर्ष आज हजारों युवाओं को यह सिखाता है कि हार मानना कभी विकल्प नहीं होता।

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