हजारीबाग, झारखंड। जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के प्रभाव में आकर एक मां ने अपनी ही 12–13 साल की मासूम बेटी की हत्या कर दी। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
घटना कैसे सामने आई
घटना 24 मार्च की रात की है। गांव में मंगला जुलूस का माहौल था और लोग उत्सव में शामिल थे। उसी दौरान बच्ची अपनी मां के साथ घर से निकली, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटी। परिजनों को चिंता हुई, मगर अगली सुबह जो सामने आया, उसने पूरे गांव को दहशत में डाल दिया।
25 मार्च की सुबह कुसुम्भा गांव स्थित मिडिल स्कूल के पीछे बांस की झाड़ियों में बच्ची का शव मिला। शव की स्थिति को देखकर शुरुआत में दुष्कर्म और हत्या की आशंका जताई गई, जिससे गांव में आक्रोश फैल गया और लोग सड़कों पर उतर आए।
जांच में बड़ा खुलासा
मामले में बच्ची की मां के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने जांच शुरू की। घटना की गंभीरता को देखते हुए 26 मार्च को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। शुरुआत में यह मामला अपहरण और हत्या जैसा लग रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर सच्चाई पूरी तरह अलग निकली।
जांच के दौरान सामने आया कि बच्ची की मां अपने बेटे की शारीरिक और मानसिक समस्याओं को लेकर परेशान थी। इसी बीच उसका संपर्क गांव की एक महिला शांति देवी उर्फ भगतिनी से हुआ, जो तंत्र-मंत्र से जुड़े काम करती थी। आरोप है कि भगतिनी ने समस्या के समाधान के लिए ‘कुंवारी लड़की की बलि’ देने की बात कही।
कैसे रची गई साजिश
पुलिस के अनुसार, मां इस बात के लिए तैयार हो गई और अपनी ही बेटी को इस कृत्य के लिए चुन लिया। घटना की रात बच्ची को बहाने से भगतिनी के घर ले जाया गया, जहां पहले से एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था। इसके बाद तीनों ने मिलकर बच्ची को बांसवाड़ी में ले जाकर उसका गला दबाकर हत्या कर दी।
जांच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद तंत्र-मंत्र के नाम पर शव के साथ अमानवीय कृत्य किए गए। यह खुलासा सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश और भय का माहौल है।
पुलिस कार्रवाई और आगे की जांच
SIT की कार्रवाई में पुलिस ने तीनों आरोपियों—मां रेशमी देवी, शांति देवी उर्फ भगतिनी और सहयोगी भीम राम—को गिरफ्तार कर लिया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।
इस घटना की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और राज्य के अधिकारियों से जवाब मांगा। अदालत ने कार्रवाई में हुई देरी पर सवाल उठाए, जिसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पूरे मामले का खुलासा किया।
समाज के लिए चेतावनी
यह घटना समाज में फैल रहे अंधविश्वास के खतरनाक प्रभाव को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और शिक्षा के अभाव में इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, जिन्हें रोकना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।

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