चाय बागान श्रमिकों की हालत पर चिंता
भाजपा पर सीधा हमला
अधिकारों और सम्मान की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि चाय बागान श्रमिकों और आदिवासी समुदाय को आज भी
- भूमि अधिकार
- सम्मानजनक आवास
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
- बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं
जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की तरह असम में भी युवाओं को अवसर, मेहनतकशों को सम्मान और आदिवासी-स्थानीय समाज को उनका हक मिलना ही चाहिए।
बदलाव का आह्वान
हेमंत सोरेन ने लोगों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि अब बदलाव का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह झारखंड में पूर्वजों ने संघर्ष कर अपने अधिकार हासिल किए, उसी तरह असम में भी अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ी जाएगी।
उन्होंने चाय बागान श्रमिकों और आदिवासी समाज से एकजुट होकर अपने हक के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया और आगामी चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशियों को समर्थन देने की अपील की।
अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट कहा कि आदिवासी समाज की ताकत को कम आंकना बड़ी भूल होगी। यह समाज सिर्फ संघर्ष करना ही नहीं, बल्कि सत्ता बनाना और जरूरत पड़ने पर उसे बदलना भी जानता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अब आदिवासी समाज चुप नहीं बैठेगा, बल्कि अपने अधिकार लेकर रहेगा और इसके लिए लगातार संघर्ष जारी रखेगा।
विकास पर बड़ा बयान
बड़ी संख्या में जुटी भीड़
इस मौके पर झारखंड सरकार के कई कैबिनेट मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ विधायक भी मौजूद रहे। जनसभा में हजारों की भीड़ यह साफ संकेत दे रही थी कि चाय बागान श्रमिक, आदिवासी समुदाय और स्थानीय लोग अब सिर्फ सुनने के लिए नहीं, बल्कि बदलाव लाने के लिए मैदान में उतर चुके हैं।





0 Comments