असम चुनाव में गरजे हेमंत सोरेन: “भाजपा ने आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक बनाया”

 डिब्रूगढ़/सोनारी (असम): असम विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने डिब्रूगढ़ जिले के तिनसुकिया और सोनारी विधानसभा क्षेत्रों में जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आदिवासी और चाय बागान श्रमिकों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती रही है।

चाय बागान श्रमिकों की हालत पर चिंता

मुख्यमंत्री ने कहा कि असम का चाय बागान समुदाय करीब 200 वर्षों से राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है, लेकिन आज भी यह समुदाय बुनियादी अधिकारों से वंचित है।
उन्होंने बताया कि श्रमिकों को बेहद कम मजदूरी मिलती है, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।

भाजपा पर सीधा हमला

हेमंत सोरेन ने अपने भाषण में तीखा बयान देते हुए कहा कि
“भाजपा सरकार हर चुनाव में आदिवासियों का उपयोग करती है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उन्हें उनके हाल पर छोड़ देती है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से इस समुदाय को केवल राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया, जबकि उनके जीवन स्तर में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ।

अधिकारों और सम्मान की मांग

मुख्यमंत्री ने कहा कि चाय बागान श्रमिकों और आदिवासी समुदाय को आज भी

  • भूमि अधिकार
  • सम्मानजनक आवास
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
  • बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं

जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की तरह असम में भी युवाओं को अवसर, मेहनतकशों को सम्मान और आदिवासी-स्थानीय समाज को उनका हक मिलना ही चाहिए।

बदलाव का आह्वान

हेमंत सोरेन ने लोगों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि अब बदलाव का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह झारखंड में पूर्वजों ने संघर्ष कर अपने अधिकार हासिल किए, उसी तरह असम में भी अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ी जाएगी।

उन्होंने चाय बागान श्रमिकों और आदिवासी समाज से एकजुट होकर अपने हक के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया और आगामी चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशियों को समर्थन देने की अपील की।

अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट कहा कि आदिवासी समाज की ताकत को कम आंकना बड़ी भूल होगी। यह समाज सिर्फ संघर्ष करना ही नहीं, बल्कि सत्ता बनाना और जरूरत पड़ने पर उसे बदलना भी जानता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि अब आदिवासी समाज चुप नहीं बैठेगा, बल्कि अपने अधिकार लेकर रहेगा और इसके लिए लगातार संघर्ष जारी रखेगा।

विकास पर बड़ा बयान

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का मतलब केवल आंकड़ों की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि हर घर तक खुशहाली पहुंचाना है। असम के सोनारी विधानसभा क्षेत्र की जनता अब बदलाव चाहती है — ऐसा बदलाव जो सिर्फ भाषणों और वादों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर साफ दिखाई दे।


बड़ी संख्या में जुटी भीड़

इस मौके पर झारखंड सरकार के कई कैबिनेट मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ विधायक भी मौजूद रहे। जनसभा में हजारों की भीड़ यह साफ संकेत दे रही थी कि चाय बागान श्रमिक, आदिवासी समुदाय और स्थानीय लोग अब सिर्फ सुनने के लिए नहीं, बल्कि बदलाव लाने के लिए मैदान में उतर चुके हैं।



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