सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले में इन दिनों मुर्गी पालन का एक खास तरीका किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यहां के कई किसान ‘व्हाइट लेगहॉर्न’ नस्ल की मुर्गियों जो आमतौर पर केरल जैसे दक्षिणी राज्यों में ज्यादा पाई जाती हैं, का पालन कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में इस नस्ल को आम बोलचाल में 'पुलेट’ भी कहा जाता है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि व्हाइट लेगहॉर्न मुर्गियां अंडा उत्पादन के लिए काफी बेहतर मानी जाती हैं। यह मुर्गी लगभग 18 से 24 महीनों तक लगातार अंडे देती रहती है, जिससे किसानों को नियमित आय का अच्छा स्रोत मिल जाता है। यही वजह है कि जिले के कई किसान अब इस नस्ल की मुर्गियों को पालने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
मुर्गी पालक किसानों के मुताबिक इस नस्ल की खास बात यह है कि इनके पालन में ज्यादा खर्च नहीं आता। इन्हें वही सामान्य दाना और भोजन दिया जाता है जो दूसरी मुर्गियों को दिया जाता है। बस इनके रहने की जगह साफ-सुथरी हो और तापमान संतुलित रखा जाए तो यह मुर्गियां स्वस्थ रहती हैं और अंडा उत्पादन भी अच्छा करती हैं।
पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान बेहतर नस्ल की मुर्गियों को अपनाएं तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। सरायकेला जिले में व्हाइट लेगहॉर्न मुर्गी पालन इसका अच्छा उदाहरण बनता जा रहा है, जिससे किसानों की आमदनी में भी बढ़ोतरी हो रही है।


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