कहते हैं अगर इंसान ठान ले तो हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, मंज़िल जरूर मिलती है। झारखंड की राजधानी रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
कर्नाटक के बेलगांव के एक छोटे से गांव में जन्मे मंजूनाथ भजंत्री का बचपन काफी संघर्ष भरा रहा। घर की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि पढ़ाई जारी रखना भी आसान नहीं था। लेकिन उनके पिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने जंगल से लकड़ियां काटकर और मेहनत-मजदूरी करके अपने बेटे की पढ़ाई जारी रखवाई। पिता की इसी मेहनत और भरोसे ने मंजूनाथ को आगे बढ़ने की ताकत दी।
मंजूनाथ भजंत्री पढ़ाई में शुरू से ही बहुत तेज थे। बिना किसी कोचिंग के ही उन्होंने दसवीं के बोर्ड और 12वीं की परीक्षा में टॉप किया था। इसके बाद उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। आगे चलकर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। साल 2009 में पहले प्रयास में उनका चयन आईपीएस के लिए हो गया, लेकिन उनका सपना आईएएस बनने का था। इसलिए उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और 2011 में आईएएस अधिकारी बनकर अपना सपना पूरा कर लिया।
आज मंजूनाथ भजंत्री झारखंड में अपनी सख्त कार्यशैली और जनसुनवाई के लिए जाने जाते हैं। देवघर और जमशेदपुर जैसे जिलों में सेवा देने के बाद फिलहाल वे रांची के डीसी के रूप में काम कर रहे हैं।
उनकी कहानी यही बताती है कि मेहनत और हौसला हो तो गरीब घर का बेटा भी एक दिन बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है।

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