झारखंड का औद्योगिक शहर धनबाद, जिसे देश की कोयला राजधानी कहा जाता है, अब बढ़ते प्रदूषण के कारण नई चिंता का विषय बन गया है। हाल ही में जारी एक वैश्विक वायु गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में धनबाद का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 124 दर्ज किया गया, जो राज्य में सबसे अधिक है। वहीं पीएम 2.5 का स्तर 44.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित मानक से नौ गुना अधिक है।
किन इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा
खराब
रिपोर्ट में झारखंड के 24 जिलों के 73 क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया, जिसमें धनबाद के 12 इलाके—जैसे
झरिया, कतरास, निरसा, गोविंदपुर और जामाडोबा—सबसे ज्यादा
प्रभावित पाए गए। इन क्षेत्रों में खनन, कोयला
ढुलाई और औद्योगिक गतिविधियों का सीधा असर वायु गुणवत्ता पर देखा गया। हालांकि
तोपचांची में स्थिति थोड़ी बेहतर रही, लेकिन
वहां का स्तर भी सुरक्षित सीमा से ऊपर ही दर्ज हुआ।
प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, धनबाद में प्रदूषण के पीछे कई कारण
जिम्मेदार हैं। कोयला खनन और ढुलाई के दौरान उड़ने वाली धूल, तेजी से बढ़ती वाहनों की संख्या,
सड़कों पर जमा धूल और
निर्माण कार्य, साथ ही औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं इस समस्या
को लगातार बढ़ा रहे हैं। बढ़ती जनसंख्या घनत्व भी स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर असर
डॉक्टरों के मुताबिक, हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5) फेफड़ों और हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा
बढ़ाते हैं। अस्थमा, एलर्जी और ब्रोंकाइटिस के मामलों में
वृद्धि हो रही है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका
अधिक प्रभाव पड़ रहा है। लंबे समय में यह जीवन प्रत्याशा को भी प्रभावित कर सकता
है।
कहां मिल रही है राहत
नेतरहाट, लातेहार, गढ़वा और मेदिनीनगर जैसे इलाकों में
वायु गुणवत्ता अपेक्षाकृत बेहतर दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में घना हरित आवरण,
कम औद्योगिक गतिविधियां और सीमित जनसंख्या दबाव
प्रमुख कारण हैं।
कैसे सुधर सकते हैं हालात
विशेषज्ञों का सुझाव है कि खनन
क्षेत्रों में डस्ट कंट्रोल सिस्टम को मजबूत किया जाए, सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव हो, सार्वजनिक परिवहन और ई-वाहनों को बढ़ावा दिया जाए तथा हरित आवरण
बढ़ाया जाए। औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्ती भी जरूरी है।
निष्कर्ष: यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो धनबाद में वायु प्रदूषण आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकता है,
जिससे जनस्वास्थ्य पर बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता
है।

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