टाटा पावर की 436.93 एकड़ जमीन का सत्यापन और मापी शुरू, जियाडा की संयुक्त समिति कर रही जांच; नवंबर 2026 तक सरकार को रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य
सरायकेला-खरसावां: चांडिल अनुमंडल के कुकड़ू प्रखंड में औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं आकार लेती दिखाई दे रही हैं। वर्षों से उपयोग में नहीं आ रही करीब 436.93 एकड़ रैयती जमीन को अब औद्योगिक गतिविधियों के लिए विकसित करने की दिशा में तैयारी शुरू हो गई है।
टाटा पावर कंपनी लिमिटेड के जोजोबेड़ा प्लांट की ओर से इस जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र या इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया है। प्रस्ताव के बाद झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (जियाडा) ने जमीन की जांच, भौतिक सत्यापन और मापी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अगर प्रस्ताव आगे बढ़ता है और सरकार की मंजूरी मिलती है, तो कुकड़ू और आसपास के क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है। इससे स्थानीय रोजगार, छोटे कारोबार और सहायक उद्योगों के लिए भी नए अवसर बनने की उम्मीद है।
वर्षों से खाली जमीन के उपयोग की तैयारी
कुकड़ू क्षेत्र में मौजूद करीब 436.93 एकड़ जमीन लंबे समय से उपयोग में नहीं आ रही थी। पहले इस जमीन पर टाटा पावर के प्रस्तावित बिजली प्रोजेक्ट की योजना थी, लेकिन वह परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी।
इसके बाद कंपनी की ओर से इस जमीन को औद्योगिक क्षेत्र या औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया है। इससे लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी जमीन को भविष्य में आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की संभावना बनी है।
जियाडा ने शुरू किया जमीन का सत्यापन और मापी
प्रस्ताव मिलने के बाद जियाडा ने जमीन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए भौतिक सत्यापन और मापी शुरू करा दी है।
इसके लिए एक संयुक्त समिति का गठन किया गया है। समिति में जियाडा के आदित्यपुर और रांची कार्यालयों के अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ तथा टाटा पावर के प्रतिनिधि शामिल हैं।
यह समिति जमीन की औद्योगिक उपयोगिता और वहां भविष्य में औद्योगिक गतिविधियां विकसित करने की संभावनाओं की जांच कर रही है।
नवंबर 2026 तक सरकार को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
जमीन की जांच और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद नवंबर 2026 तक राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।
रिपोर्ट के आधार पर सरकार के स्तर पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की अगली प्रक्रिया शुरू होगी। इसलिए फिलहाल इसे अंतिम रूप से स्वीकृत इंडस्ट्रियल पार्क कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन जमीन की जांच शुरू होना इस दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआती कदम है।
कुकड़ू में उद्योग आए तो क्या बदलेगा?
अगर प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र भविष्य में आकार लेता है, तो इसका असर केवल बड़ी औद्योगिक इकाइयों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है।
औद्योगिक गतिविधियों के साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स, निर्माण, सप्लाई, मरम्मत, खान-पान और दूसरी सहायक सेवाओं से जुड़े छोटे कारोबार भी विकसित हो सकते हैं।
स्थानीय स्तर पर इसके संभावित प्रभावों में शामिल हैं:
- स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर
- छोटे कारोबार और स्थानीय बाजार को बढ़ावा
- क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार
- बुनियादी सुविधाओं के विकास की संभावना
- सहायक और ancillary industries के लिए अवसर
- रोजगार मिलने पर क्षेत्र से पलायन में कमी की संभावना
- कुकड़ू और चांडिल की औद्योगिक पहचान मजबूत होने की उम्मीद
आदित्यपुर के बाद नए औद्योगिक विस्तार की संभावना
आदित्यपुर क्षेत्र पहले से ही झारखंड के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां लंबे समय से उद्योगों और सहायक इकाइयों का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में भविष्य के औद्योगिक विस्तार के लिए नए क्षेत्रों की तलाश महत्वपूर्ण हो जाती है।
कुकड़ू में करीब 437 एकड़ का बड़ा भूखंड उपलब्ध होना इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। यदि जांच और सरकारी प्रक्रिया के बाद प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो कुकड़ू भविष्य में आदित्यपुर के आसपास औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के एक नए केंद्र के रूप में उभर सकता है।
स्थानीय युवाओं के लिए बन सकते हैं नए अवसर
औद्योगिक विकास का सबसे बड़ा संभावित असर रोजगार के क्षेत्र में देखा जा सकता है। नए उद्योगों के साथ केवल फैक्ट्री में ही नौकरियां नहीं बनतीं, बल्कि ड्राइविंग, परिवहन, सुरक्षा, तकनीकी सेवाएं, मशीनरी रिपेयर, होटल-रेस्तरां, दुकानें और सप्लाई से जुड़े कई छोटे-बड़े काम भी बढ़ सकते हैं।
इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
हालांकि, अभी यह बताना जल्दबाजी होगी कि कितने उद्योग स्थापित होंगे या कितने लोगों को रोजगार मिलेगा। ये आंकड़े परियोजना की अंतिम मंजूरी और विस्तृत योजना तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
छोटे कारोबार को भी मिल सकता है फायदा
औद्योगिक क्षेत्र का विकास आसपास के छोटे व्यापारियों के लिए भी नई संभावनाएं पैदा कर सकता है।
औद्योगिक इकाइयों की जरूरतों के अनुसार परिवहन, भोजन, किराये के मकान, किराना, हार्डवेयर, वाहन मरम्मत, लॉजिस्टिक्स और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ सकती है।
इस तरह बड़े उद्योगों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर छोटे और मध्यम कारोबार का एक नया इकोसिस्टम विकसित होने की संभावना बन सकती है।
चांडिल-कुकड़ू की बदल सकती है पहचान
कुकड़ू में प्रस्तावित औद्योगिक विकास केवल एक जमीन के उपयोग का मामला नहीं है। यदि योजना आगे बढ़ती है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
बेहतर आधारभूत सुविधाएं, नए कारोबार, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से चांडिल अनुमंडल की आर्थिक पहचान को भी मजबूती मिल सकती है।
हालांकि, फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण चरण जमीन की जांच और फिजिबिलिटी रिपोर्ट है। इसके बाद सरकार के निर्णय से ही आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।
अब रिपोर्ट पर टिकी नजर
कुकड़ू की 436.93 एकड़ जमीन को लेकर शुरू हुई यह प्रक्रिया क्षेत्र के लिए एक नई औद्योगिक संभावना का संकेत दे रही है। जियाडा की संयुक्त समिति जमीन की उपयोगिता और अन्य जरूरी पहलुओं की जांच कर रही है।
नवंबर 2026 तक सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य है। इसके बाद सरकार के निर्णय के आधार पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि वर्षों से उपयोग में नहीं आ रही बड़ी जमीन को औद्योगिक गतिविधियों से जोड़ने की पहल ने कुकड़ू और आसपास के क्षेत्र में विकास, रोजगार और कारोबार की नई उम्मीद पैदा की है।

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