रांची: झारखंड के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के कैंसर विंग में दवाओं की खरीद और मरीजों से ली जा रही रकम को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि मरीजों और उनके परिजनों को दवाओं पर 30 से 40 प्रतिशत तक की छूट देने की बात कही जाती है, लेकिन इसके बावजूद कुछ मामलों में दवाओं की वास्तविक खरीद कीमत की तुलना में कई गुना अधिक राशि वसूले जाने का दावा किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि कुछ दवाओं की कीमत और मरीजों से वसूली गई रकम के बीच अंतर दो से चार गुना तक होने का आरोप है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
कैंसर का इलाज लंबे समय तक चलने वाला और काफी महंगा होता है। कई मरीजों को नियमित रूप से महंगी दवाओं की जरूरत पड़ती है। ऐसे में यदि दवाओं की खरीद में निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायत सही पाई जाती है, तो इसका सीधा असर मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ सकता है।
दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल
मामले में कुछ दवा कंपनियों के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। दावा है कि कुछ MR कैंसर विंग में सक्रिय रहते हैं और डॉक्टरों के संपर्क में रहकर विशेष दवाओं की बिक्री को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ ही कथित कमीशनखोरी की आशंका भी जताई गई है।
हालांकि, इन आरोपों को फिलहाल केवल दावे और शिकायतों के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी डॉक्टर, कर्मचारी, दवा कंपनी या अन्य व्यक्ति की जिम्मेदारी जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही तय की जा सकती है।
जांच में किन दस्तावेजों की जरूरत?
पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए संबंधित दवाओं की खरीद कीमत, सप्लाई रिकॉर्ड, बिल, MRP, मरीजों को जारी किए गए बिल और वास्तविक भुगतान की जांच महत्वपूर्ण होगी। इन दस्तावेजों की तुलना से यह पता लगाया जा सकता है कि दवाओं की वास्तविक कीमत और मरीजों से ली गई रकम के बीच कितना अंतर था।
यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या मरीजों से अनुचित वसूली की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ प्रभावित मरीजों को राहत देने की व्यवस्था भी जरूरी होगी।
फिलहाल रिम्स प्रशासन और संबंधित दवा कंपनियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि दवाओं की कीमतों में कथित अंतर का वास्तविक कारण क्या था और क्या मरीजों से निर्धारित नियमों के विपरीत राशि वसूली गई।

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